मुक्तक

शामे-आलम में तेरी प्यास चली आती है!
लहर ख्वाहिशों की मेरे पास चली आती है!
दर्द की दीवारों से टकराती है जिन्द़गी,
ख्वाबों की तस्वीर बदहवास चली आती है!

मुक्तककार-#महादेव’

Comments

3 responses to “मुक्तक”

  1. Kanchan Dwivedi

    Good

  2. Pratima chaudhary

    Nicee

  3. Pragya Shukla

    वेरी नाइस

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