मुक्तक

तुम बार बार नजरों में आया न करो!
तुम बार बार मुझको तड़पाया न करो!
जिन्दा है अभी जख्म गमें-बेरुखी का,
तुम बार बार दर्द को बुलाया न करो!

मुक्तककार- #महादेव'(22)

Comments

6 responses to “मुक्तक”

  1. Kumar Bunty Avatar
    Kumar Bunty

    NICE LINES

  2. राम नरेशपुरवाला

    Wah

  3. Abhishek kumar

    Nice

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