जाने क्यों नदिया सागर से मिल जाती है ,
मिलो का रास्ता तय कर सागर को
मंजिल क्यों बनाती है !
पवित्र है, पावन है, निर्मल जल की धारा है,
खारे पानी मे मिलना जाने क्यों इसे गवारा है !
हिमालय की बिटिया है ये ,
मेरी माँ मुझसे कहती थी
रखती है दृढ़ निश्चय अपना
चाहे चले जिस भी रास्ते पर
सागर से मिल जाती है!
सागर का अस्तित्व बचाने को अपना
अस्तित्व मिटाती है !
जाने क्यों नदिया सागर मे मिल जाती है !
जाने क्यों
Comments
7 responses to “जाने क्यों”
-

nice
-

thanx
-
-

BEHATREEN
-

thanku
-
-

Wah
-

Good
-
सुन्दर रचना
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.