मुक्तक

उठती हुई नजर में एक आशा भी होती है!
मंजिल को छूने की अभिलाषा भी होती है!
रोशनी मौजूद है अभी जिन्दगी में लेकिन,
जज्बों के टूटने की परिभाषा भी होती है!

मुक्तककार- #महादेव'(27)

Comments

2 responses to “मुक्तक”

  1. Abhishek kumar

    Jai ho

  2. nitu kandera

    Jai ho

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