मुक्तक

मैं दफ्न उजालों का डूबा हुआ शहर हूँ!
मैं वक्ते-तन्हाई में यादों का सफर हूँ!
ढूँढता हूँ खुद को खौफ के अंधेरों में,
मैं ख्वाहिशों की राह में बेखुदी का डर हूँ!

#महादेव_की_कविताऐं’

Comments

7 responses to “मुक्तक”

  1. Abhishek kumar

    Awesome

Leave a Reply

New Report

Close