मुक्तक

दर्द के दामन में चाहत के कमल खिलते हैं!
अश्क की लकीर पर यादों के कदम चलते हैं!
रेंगते ख्यालों में नजर आती हैं मंजिलें,
जब भी निगाहों में ख्वाबों के दिये जलते हैं!

मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

Comments

3 responses to “मुक्तक”

  1. Anirudh sethi Avatar
    Anirudh sethi

    nice

    1. Mithilesh Rai Avatar

      धन्यवाद आदरणीय

  2. Abhishek kumar

    Jai ho

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