मुक्तक

हर शक्स जमाने में गुमनाम जैसा है!
दर्द और तन्हाई की शाम जैसा है!
जलता हुआ सफर है राहे-मंजिलों का,
जिन्दगी को ढूँढता पैगाम जैसा है!

मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

Comments

One response to “मुक्तक”

  1. Abhishek kumar

    Nice

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