मुक्तक

आज भी तेरे लिए हम यार बैठे हैं!
तेरी चाहत में गिरफ्तार बैठे हैं!
कोई डर नहीं है जुल्मों के दौर का,
हर जख्म के लिए हम तैयार बैठे हैं!

मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

Comments

2 responses to “मुक्तक”

  1. सीमा राठी Avatar
    सीमा राठी

    very nice 🙂

  2. Abhishek kumar

    Nice

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