मुक्तक

कौन मेरी तन्हाई में हमारा बनेगा?
नाकामियों के दौर में बेचारा बनेगा!
टूटती मीनार हूँ अपने आशियाने की,
अब कौन इन दीवारों का सहारा बनेगा?

मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

Comments

One response to “मुक्तक”

  1. Abhishek kumar

    Good

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