मुक्तक

हरबार तुम एक ही नादानी करते हो!
हर किसी से जिक्र तुम कहानी करते हो!
हँसते हुए सहते हो अपनों के सितम को,
हरबार तुम अपनी कुर्बानी करते हो!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

Comments

2 responses to “मुक्तक”

  1. Aarush Patel Avatar
    Aarush Patel

    बहुत खूब

  2. Abhishek kumar

    Good

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