मुक्तक

मेरे सितमगर फिर से कोई वादा न करो!
मेरे दिल़ को तोड़ने का इरादा न करो!
क्यों इम्तिहान लेते हो कई बार सब्र का?
चाहत की बेचैनी को और ज्यादा न करो!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

Comments

3 responses to “मुक्तक”

  1. bhoomipatelvineeta Avatar
    bhoomipatelvineeta

    Nice one sir….

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