मुक्तक

बेवफाओं की कोई सूरत क्या होती है?
नाखुदाओं की कोई मूरत क्या होती है?
जब कौम की जागीरों में बँटा है आदमी,
इंसानियत की कोई जरुरत क्या होती है?

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

Comments

4 responses to “मुक्तक”

  1. Neha Saxena Avatar

    बहुत बढ़िया सर जी

    1. Mithilesh Rai Avatar

      शुक्रिया आपका

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