है परिभाषित सतत संघर्ष और संग्राम अभिनंदन।
हैं हम सारे अयोध्या के निवासी, राम अभिनंदन।
वो जो हर भौंकते से श्वान का मुंह वाण से भर दे।
कि इस कलयुग में उस एकलव्य है नाम अभिनंदन।
मुक्तक
Comments
4 responses to “मुक्तक”
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Nice
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Wahhh
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Nice
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वह
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