इन हाथों में अरसों तक थी उनके हाथ की खुशबु। जैसे रातरानी से महकती रात की खुशबु। इत्र हो गई जो बूंदें लिपटकर उनसे, दुनिया को ये भरम कि ये बरसात की खुशबु।

है परिभाषित सतत संघर्ष और संग्राम अभिनंदन। हैं हम सारे अयोध्या के निवासी, राम अभिनंदन। वो जो हर भौंकते से श्वान का मुंह वाण से भर दे। कि इस कलयुग में उस एकलव्य है नाम […]

मात्र श्रृंगार की ना रहे पराकाष्ठा इसमें अंगार भी चरम होना चाहिए। मात्र प्रेम और आसक्ति ना बने कविता पंक्तियों में वंदे मातरम होना चाहिए।

तुम बॉलिवुड अभिनेत्री सी, मैं भागलपुर का अभियंता। तुम भरी विद्वता की चर्चा, मैं चुटकुलों का सन्ता बन्ता। तुम झांसी की रानी जैसी, मैं धरने पर बैठी ममता। तुम कॉर्पोरेट की लीडर, मैं जनधन खाते […]

लक्ष्मण और मेघनाद का युद्ध आ गया अंततः वह भी क्षण आरंभ हुआ समर भीषण। दो वीर अडिग, अटल वीरत्व था साक्ष्य धरा का तत्व तत्व। एक ओर अहीश स्वयं लक्ष्मण है मही सकल टिकी […]

किसी अनजान से बोझ से झुका झुका ये फल दरख्त़ की झड़ों में ढूंढ़ता सुकून के चन्द पल। कभी मिले पत्तों के नर्म साए तो कभी इनमे छनकर आती कुछ सख्त़ किरणें भी। बहुत रोया […]

मां भारती का सहस्त्र वंदन, रही है आवृत ये गोधुली से यहीं दिगम्बर ये अन्नदाता, लगे है पाथेय संबली से। यहीं पे खेले चराए गैया, जगत खिवैया किशन कन्हैया यहीं त्रिलोकेश सूर्यवंशी, यहीं कपिश्वर महाबली […]

रातभर हम ओस पर खींचा किए थे लकीरें, सुबह को सुरज मुआ दुनिया उड़ा कर ले गया। हमने ज़मीं पर बैठकर इंचों में नापा आसमां, जाना तो माना कहां तारे से तारा रह गया। आंखों […]

मीलों का पथ, पथरीला भी पथिक हूं मैं भी, चल दूंगा। सारे मौसम शुष्क रहे क्यों बादल हूं मैं, बदल दूंगा। भीष्म बनो तुम, कर्ण बनो तुम पार्थ हूं मैं भी, ध्यान रहे। मार्ग मेरा […]