मुलाक़ात

वक्त निकल गया निगाहों से निगाहें मिलाने में,
सफर में एक दूजे को समझने -समझाने में,

परिचय तो पहली मुलाक़ात में हो गया मगर,
ढूढ़ते रहे हम खुद को अपने ही मकानों में।।
राही (अंजाना(

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