मुस्कुराहट

मुस्कुराहट फूल का ही रूप है
मुस्कुराओ और खुशबू को बिखेरो
खुद रहो खुश और सबको प्रेम दो
नफरतों को छोड़कर बस प्रेम दो।
खूब भीगो नेह की बरसात में,
धुन में गाओ खूब झूमो राग में
मन रखो पावन, रखो निर्मल नयन
मत रखो अपने कदम तुम दाग में।

Comments

4 responses to “मुस्कुराहट”

  1. कवि सतीश जी की बहुत सुन्दर और मधुर रचना

  2. Rohit

    बहुत सुंदर रचना

  3. Amita

    बहुत ही सुंदर कृति सर 🙏🙏

  4. रोहित

    अति सुन्दर सृजन

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