मेरी भक्ति-भजन को यदि तुम पढ़ोगे
तब जाके कहीं तुम मुझे समझोगे
मेरी भक्ति-भजन को यदि तुम पढ़ोगे
तब जाके कहीं तुम मुझे समझोगे
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मेरी भक्ति-भजन को यदि तुम पढ़ोगे
तब जाके कहीं तुम मुझे समझोगे ।।1।।
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किसी को समझना अगर इतना आसान होता
तो लोग कबीर, तुलसी को पढ़के राम का भक्त होता
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मेरी भक्ति भजन को यदि तुम पढ़ोगे
तब जाके कहीं तुम मुझे समझोगे ।।2।।
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ब्रह्मचर्य की महिमा को सिर्फ आत्मा ही बताती
जो लोग ब्रह्मचर्य पालने करते
उसे हर घड़ी ब्रह्म ही ब्रह्म दिखते
ब्रह्मचर्य की महिमा को सिर्फ आत्मा ही बताती
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मेरी भक्ति भजन को यदि तुम पढ़ोगे
तब जाके कहीं तुम मुझे समझोगे ।।3।।
कवि विकास कुमार
मेरी भक्ति-भजन को यदि तुम पढ़ोगे
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One response to “मेरी भक्ति-भजन को यदि तुम पढ़ोगे”
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जय श्री राम
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