मेरे खत चाहो जब जला दो

मेरे खत चाहो जब जला दो
पर उसकी राख मुझे दे दो /
इस रूह से लिखा था जिसे ,
रूह को राख की अमानत दे दो /
राजेश’अरमान’

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2 responses to “मेरे खत चाहो जब जला दो”

  1. राम नरेशपुरवाला

    G

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