2 Comments

  1. दुख की बदली छाई है मेरे सर पे
    सुख की चाह करता नहीं रब मैं तुम से
    तु चाहे जैसे रख ले, अपनी शरण में
    ________ प्रभु की आराधना करती हुई और प्रभु की शरण में स्वयं को रखते हुए कवि विकास जी की अति उत्तम रचना

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