स्थिति कैसी भी आये
मगर तू रखना मन में हिम्मत।
हिम्मत से ही जीत मिलेगी,
हारेगी कठिनाई।
कभी घड़ी
कठिन आ जाये,
समझ परीक्षा आई।
भय मत करना
आये चाहे
कैसी भी कठिनाई।
तुझे लगेगा हार गया हूँ
मूर्छा मन में छाई,
तब देना छींटे उमंग के
भागेगी कठिनाई।
जिसने भी संघर्ष किया है,
जीत उसी ने पाई,
जो पहले ही हार गया हो
वो क्या जीते भाई।
हार नहीं हो
शब्दकोश में,
जीत मंत्र ले साध,
क्या होगा कैसा होगा
यह नहीं सोच तू बात।
अंतिम सांस बची हो जब तक
आस न छोड़ना भाई,
ईश्वर मदद करेगा तेरी,
होगी सब भरपाई।
आज रात है
कल दिन होगा,
भागेगी कठिनाई,
तेरी हिम्मत बढ़े रे मानव
तब यह कविता गाई,
सार्थक गीत बना दे मेरा
हिम्मत रख ले भाई।
रखना मन में हिम्मत
Comments
3 responses to “रखना मन में हिम्मत”
-
तेरी हिम्मत बढ़े रे मानव
तब यह कविता गाई,
सार्थक गीत बना दे मेरा
हिम्मत रख ले भाई।
_________ बहुत ही खूबसूरत कविता है सतीश जी। हिम्मत प्रदान करती हुई लाजवाब और उच्च स्तरीय रचना, अति उत्तम लेखन -

जिसने भी संघर्ष किया है जीत उसी ने पाई है।
अति उत्तम -
अतिसुंदर
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