राहें खत्म होती ही नहीं,
इस जिंदगी की,
हर मोड़ पर नया हुजूम
मेरा इंतजार करता है,
मुड़ जाऊं इस राह से,
खामोशी को तोड़कर ,
आगे बढ़ने को जी चाहता है
मगर यह ऐसा गोल भंवर है,
जिसके घेरे का,
ना कोई अंत है,
ना ही सीमा….
राहें खत्म होती ही नहीं,
इस जिंदगी की,
हर मोड़ पर नया हुजूम
मेरा इंतजार करता है,
मुड़ जाऊं इस राह से,
खामोशी को तोड़कर ,
आगे बढ़ने को जी चाहता है
मगर यह ऐसा गोल भंवर है,
जिसके घेरे का,
ना कोई अंत है,
ना ही सीमा….