राहें खत्म होती ही नहीं,
इस जिंदगी की,
हर मोड़ पर नया हुजूम
मेरा इंतजार करता है,
मुड़ जाऊं इस राह से,
खामोशी को तोड़कर ,
आगे बढ़ने को जी चाहता है
मगर यह ऐसा गोल भंवर है,
जिसके घेरे का,
ना कोई अंत है,
ना ही सीमा….
राहें खत्म होती ही नहीं….
Comments
24 responses to “राहें खत्म होती ही नहीं….”
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वाह, अति सुन्दर
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हार्दिक धन्यवाद
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सुन्दर
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धन्यवाद जी
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बहुत खूब
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धन्यवाद प्रज्ञा जी
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सही कहा आपने।
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धन्यवाद
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अतिसुंदर
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Thank you
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👌👌👌
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धन्यवाद
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नफरत सी होने लगी है इस सफ़र से अब,
ज़िंदगी कहीं तो पहुँचा दे खत्म होने से पहले।-

बहुत सुंदर
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मंजिलें मुझे छोड़ गयी रास्तों ने संभाल लिया,
जिंदगी तेरी जरूरत नहीं मुझे हादसों ने पाल लिया।-

बहुत सुंदर पंक्तियां
हार्दिक धन्यवाद
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Behtreen 👌
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, thank you
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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Thank you
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वाह
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धन्यवाद
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Waah bahot badhiya
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Thank you
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