राहें खत्म होती ही ‌नहीं….

राहें खत्म होती ही नहीं,
इस जिंदगी की,
हर मोड़ पर नया हुजूम
मेरा इंतजार करता है,
मु‌ड़ जाऊं इस राह से,
खामोशी को तोड़कर ,
आगे बढ़ने को जी चाहता है
मगर यह ऐसा गोल भंवर है,
जिसके घेरे का,
ना कोई अंत है,
ना ही सीमा….

Comments

24 responses to “राहें खत्म होती ही ‌नहीं….”

  1. Geeta kumari

    वाह, अति सुन्दर

    1. हार्दिक धन्यवाद

    1. धन्यवाद प्रज्ञा जी

  2. Praduman Amit

    सही कहा आपने।

  3. Deep Patel

    नफरत सी होने लगी है इस सफ़र से अब,
    ज़िंदगी कहीं तो पहुँचा दे खत्म होने से पहले।

  4. Deep Patel

    मंजिलें मुझे छोड़ गयी रास्तों ने संभाल लिया,
    जिंदगी तेरी जरूरत नहीं मुझे हादसों ने पाल लिया।

    1. बहुत सुंदर पंक्तियां
      हार्दिक धन्यवाद

  5. Anil Pandey

    Behtreen 👌

  6. मोहन सिंह मानुष Avatar

    बहुत सुंदर पंक्तियां

  7. प्रतिमा

    धन्यवाद

  8. Anonymous

    Waah bahot badhiya

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