लाल

देखो सपूतों इस धरा पर,
पैर न गैर जमने पाए

कोई न अब लाल बिछड़े ,
कोई मांग उजड़ न पाए

–विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)–

Comments

4 responses to “लाल”

  1. Vijayanand V Gaitonde Avatar

    वाह , सुन्दर, बधाई …!

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