लफ़्ज

लफ़्ज हो गये है खत्म दास्ता बयां करते करते
कुछ कहते हम अक्सर थम जाते है

Comments

5 responses to “लफ़्ज”

  1. Priya Gupta Avatar

    मोहब्बत की सर्दी शुरू हो गयी है
    अश्क अब आंखों में ही जम जाते है|

  2. Anirudh sethi Avatar
    Anirudh sethi

    नूर जिंदगी से जैसे रूखसत हो गया है
    अंधेरों मैं ही हम अब रम जाते है

  3. Abhishek kumar

    Good

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