शिक्षक हो आप

कोयले को हीरा बनाने वाले।
टूटे हुए तारे को चमकाने वाले।।
शिक्षक हो आप।
अंधेरे को रोशनी दिखाने वाले।।

कोरे कागज में रंग भरे।
रंगो को आकार दिए।।
आकारों से शब्द,शब्दों से धर्म बनाने वाले।
गुरु हो आप।
भगवान को भी शिष्य बनाने वाले।

सही, ग़लत में फ़र्क।
ज्ञानी,अज्ञानी,स्वर्ग और नर्क
शिक्षा की ताकत से परिचित कराने वाले।
जीवन को जीने का ढंग बताने वाले
आचार्य हो आप।
हमें शून्य से अनंत बनाने वाले।।

शिक्षक हो आप।
अज्ञानी से ज्ञानी बनाने वाले।

Comments

5 responses to “शिक्षक हो आप”

  1. Geeta kumari

    बहुत सुंदर रचना

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar

    शिक्षक की महानता को प्रदर्शित करती हुई सुन्दर प्रस्तुति

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