शीत के सबेरे में

शीत के सबेरे में ,
मित्रता की गर्माहट,
प्यार मोहब्बत के सूरज की,
सुनकर आहट ,
भावों के पंछी चहक उठते ।

अंगुलिया ठिठुर जाएँ ,
भावना उनींदी सी ,
प्यार के गरमागरम संदेश मगर लिखती हैं ।

– जानकी प्रसाद विवश

Comments

3 responses to “शीत के सबेरे में”

  1. Aarush Patel Avatar
    Aarush Patel

    Nice

  2. Yogi Nishad Avatar

    बेहतरिन है

  3. Abhishek kumar

    Good

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