श्रृंगार की रचना

सारे सितम भुल जाऊँ
इतना प्यार देना मुझे
हर जख़्म भुल जाऊँ
इतना प्यार देना मुझे

तेरा एतबार औरों से ज़ुदा है
निगाहों में उम्मीद तु दिल से ख़ुदा है
मुस्कुराना थोड़ा सीख जाऊँ
इतनी हँसी देना मुझे

तेरे आग़ोश में मिल जाएँगे
रत्न सारे सागर के
तेरा भरोसा ही पतवार जैसा
पार करेगा मुझे–
तेरी संतात्वना ही संजीवनी
जी पाऊँगा जी भर के
सारे दर्द को सह जाऊँ
इतना इक़रार देना मुझे
सारे जख़्म भुल जाऊँ
इतना प्यार देना मुझे

हर निराशा—
प्रकाश–पुँज बन जाए
तेरा साथ हो अगर
हर रात—
पूनम हो जाएगी खिलकर
ज़िन्द़गी मुस्कुराएगी मिलकर
तो, जीना आ जाएगा मुझे
अपनी सांस भर देना मुझमें

सारे कष्ट , फिर—
फूल बनकर गुदगुदाएँगे
आँखों में आँसू–
खुशी की कहानी बताएँगे
ज़िन्द़गी तोहफ़ा होगी– हँसी की
कि—
सारे ग़म भुल जाऊँ
इतना प्यार देना मुझे
हर सितम भुल जाऊँ………..|

—–रंजित तिवारी “मुन्ना”
पटेल चौक,
कटिहार (बिहार )
पिन–854105

Comments

One response to “श्रृंगार की रचना”

Leave a Reply

New Report

Close