Ranjit's Posts

कैसा होगा अपना हिंदुस्तान

कैसा होगा अपना हिंदुस्तान…! ————————————— सुनो..सुनाई देगी तुम्हें भारत माँ की चीत्कार लहू बहे जो मेरे बेटों के- क्यों होता जा रहा बेकार—? शहादत मेरे लाल की– चुप पत्थरों में सिमट गई है मुझपर मरना मेरे बच्चों का क्यों.सिर्फ कहानी बनकर रह गयी है क्या सोचकर वे हुए थे क़ुर्बान कि, ऐसा हो जाएगा अपना हिन्दुस्त... »

तन्हाई

बैठा हुआ था मैं निरुत्तर सा होकर, कि किसी की आवाज़ आई पूछा, तो कही, मैं हूँ “तन्हाई” आपका साथ निभाने को आई शून्यता सी होठों पे मुस्कुराहट ने धाक जमाई हँसी आई, कहा मैंने तुम तो खुद हो तन्हाई फिर साथ कैसे..(?) जो खुद हो अकेला कैसे लगा सकता वो मेला हँसी लेकर होठों पे तन्हाई ने कहा बड़े प्यार से कौन साथ निभाता है यहाँ पे तन्हा आता है और तन्हा जाता है यहाँ से अर्थात, मेरे अलावा दूजा कोई साथी नहीं सभी दृश... »

कैसे होते हैं……!

कैसे होते हैं……! ——————————— कोई पहचान वाले अनजान कैसे होते हैं जानबूझ कर कोई नादान कैसे होते हैं बदलता है मौसम वक़्त और’लम्हें सुना हेै– वक़्त पर बदल जाए–इंसान कैसे होते हैं..! छोड़ दे साथ भँवर में-हमसफ़र कैसे होतें हैं सूना-सूना,तन्हा-तन्हा–सफ़र कैसे होते हैं यूँ तो दूनियाँ रास्ता है–आने-ज... »

भारतीय हो-भारतीय रहो

भारतीय हो-भारतीय रहो

भारतीय हो-भारतीय रहो ———————————- भारतीय हो–भारतीय रहो सर ऊँचा कर भारतीय कहो मिट्टी यहाँ की,संस्कृति यहाँ की संस्कारों में पली-बढ़ी है शक़्ल-ओ-सूरत मनुष्य एक सा फिर,क्यों—? सबको भेदभाव की पड़ी है व्यथित विचारों की तोड़ो बेड़ियां कौन सी अच्छाइयाँ है,इसमें न तुम खुश और हैरान भी मैं रोग विकारों का- स्वयं इलाज करो अपनी मातृभूमि प... »

अब तो संभलो…!

अब तो संभलो…! —————————- स्वार्थ के हर रंग मेें रंग गया है दिल…..देखो और मुस्कुराकर कह रहें हैं— ये दुनियाँ कितनी रंगीन है……!! “मतलब” के रस्से से अब बँध गया है तन…….देखो प्यार के वो कच्चे धागे मिल नहीं रहें हैं , आज महंगाई से मामला ग़मग़ीन है……!! औपचारिकता के रोग लगें हैं- हर लोग... »

…..बढ़ रहा है क्यों–??

…..बढ़ रहा है क्यों–?? —————————- प्यार दिखता नही,नफ़रत घटती नहीं तक़रार का अंगार बढ़ रहा है क्यों…? इंसानियत मिलती नहीं,हैवानियत मिटती नहीं संस्कारों का बिखराव बढ़ रहा है क्यों..?? क्या चाहता मानव वर्तमान का– क्यों पर्याय बन चुका हैवान का कर रहा क्यों मानवता तार-तार व्यवहार को औपचारिकता बनाकर- आपसी टकराव बढ़ रहा है क्यों̷... »

ग़मगीन लम्हों का मुस्कुराना हुआ है

ग़मगीन लम्हों का मुस्कुराना हुआ है —————————————- कोई एहसास दिल को छुआ है मुमकिन है,आपका आना हुआ है ख़्वाबों की धुन्ध छँटने लगी इक फ़साने का, हक़ीक़त होना हुआ है सिसक रही तन्हाई भी हँस पड़ी नज़र को नज़र का नज़राना हुआ है तसल्ली ने दिया-दिल को यकीं- इंतज़ार में पलों का सताना हुआ है इज़हार को मचलने लगी क़शिश सूना जीवन सुहाना हुआ है ले... »

ज़िंदा हूँ,कि–मेरा प्यार तुम हो

ज़िंदा हूँ,कि–मेरा प्यार तुम हो ————————————— तेरे दिल में याद बनकर समां जाऊंगा तेरी आँखों में नशा बनकर छा जाऊंगा क़शिश की सरहद से दूर ना जा पाओगे– मैं खुशबू बनकर एहसास की— —तेरी साँसों में घुल जाऊंगा ये तो सांसारिक बातें हैं,कि– मै तुम्हारा रहा नही कभी लेकिन— ख़्वाबों–खयालों से छुड़... »

नहीं थकती……।

नहीं थकती……। —————————- अश्रुपूरित नयन मेरे क्यों….? राह तुम्हारी ताकते नही थकती शून्यमात्र बिन तेरे-जीवन के पल “प्रीत”हमारी-कहते नही थकती मनुहार दिल की-सुने तेरा दिल भी “उम्मीदें”दिल की-सहते नही थकती गुदगुदाते मन को-मिलन के पल जो “यादें”उस पल की-हँसते नही थकती हृदय विह्वल-पुनर्मिलन की चाह म... »

अश्क़

अश्क़ ———— बातों ही बातों में पलकों की दामन में- मोतियों से कुछ दिख पड़ते “अश्क़”हैं ये–बुलबुले अरमानों के कभी चहकती खुशियाँ कभी ख़्वाब लुटतें हैं चेहरे खिल जाते,कभी– भीग जाती पलकें हैं मुस्कुराते–कभी दहकते दिल हँसी कभी सिसकती महफ़िल एहसास की बात है, यारों– कहीं इनकार छलकाते कहीं इज़हार छलकते दास्तां इनकी अजीब है जुदा-जुदा नसीब है कभी भिगोते आं... »

नहीं थकती……।

नहीं थकती……। —————————- अश्रुपूरित नयन मेरे क्यों….? राह तुम्हारी ताकते नही थकती शून्यमात्र बिन तेरे-जीवन के पल “प्रीत”हमारी-कहते नही थकती मनुहार दिल की-सुने तेरा दिल भी “उम्मीदें”दिल की-सहते नही थकती गुदगुदाते मन को-मिलन के पल जो “यादें”उस पल की-हँसते नही थकती हृदय विह्वल-पुनर्मिलन की चाह म... »

ग़रीब कौन है…?

ग़रीब कौन है…? वो— जो कष्ट से जीवन जीता है मुफ़लिसी की घूंट पीता है कपड़े तन पे नहीं आनंद जीवन में नहीं सहमी मज़बूर ज़िन्दगी “पॉलीथिन”में ग़म डुबोने– की नाकाम कोशिश–और खुद ही मरती ज़िन्दगी बनते हैं विकास के रास्ते जिनके लिए– दूर करने को अशिक्षा-असभ्यतायें बन जाती उनके लिए योजनायें या— वो– हैं ग़रीब जो बैठकर कुर्सियों पर– हिसाब लगते उंगलियों पर कै... »

रंग क्या होंगे

रंग क्या होंगे—? ————————- लिखेगी लेखनि कौन सा अक्षर स्याही के रंग क्या होंगे–? लफ़्जें कहेंगी कहानी कौन सी कथाओं में उमंग क्या होंगे—? झलकेगा इनमें कौन सा रूप झूठ बोलेगा,सच होगा चुप उपहासें या खिलखिलाहटें हँसी के रंग क्या होंगे—? फ़सानें-अफ़सानें हज़ार बातें मुद्दों का मसला नज़र नहीं आता किसलिए ये भागमभाग है मची कोई फ़ैसला नज़र नहीं... »

नवविवाहिता का पति को भाव–समर्पण…….

मेरे साजन तुम्हारा अभिनन्दन ————————————– मेरा सजने को है जीवन–आँगन मेरे साजन तुम्हारा अभिनन्दन… भाव–विभोर मेरे नैनन में स्वप्न ने ली अँगड़ाई है- जो लिखी विधाता के.हाथों– उस परम्परा की अगुवाई है खिलने वाला है नव उपवन—- मेरे साजन तुम्हारा अभिनन्दन बहुपुष्प सुगंधित सा मन अनुभूति–जैसे हरित... »

वादियाँ मुस्कुराऐंगी…..|

——————————– कहतें हैं-बदलाव प्रकृति का नियम है तभी तो, बदलता रहता मौसम है सिलसिला बदलाव का प्रखर हो चुका बेहतर से बदत्तर और भी बदत्तर हो चुका प्रेम नफ़रत बन गया— दिखावटी भाव की मेहरबानी है पहले औरों की परेशानी थी– अब अपनों से खींचातानी है मुश्किल पहचान बन गए इंसान हैवान बन गए नज़ारे बहारों के श्मशान हो गए हर कोई एक-दूजे ... »

क्या रखा है–?संसार के विकार में

—————-–————————— दुनियादारी के बाज़ार में फँस गए हम व्यापार में लाभ-हानि में हुई बेवकुफियाँ मान-हानि भी व्यवहार में नज़र-नज़र की बात निराली नज़र ने नज़र से हर बात कह डाली नज़र की नज़र से हुई तक़रार भी नज़र फिर भी नज़र.के इंतजार में दिल और ज़ुबाँ की हाथापाई हालात ज़ुबाँ के हाथ आई कसक-दिल की छटपटाहट कौन जानें दिल फिर भी ज़ुबाँ के... »

रंग क्या होंगे—?

  लिखेगी लेखनि कौन सा अक्षर स्याही के रंग क्या होंगे–? लफ़्जें कहेंगी कहानी कौन सी कथाओं में उमंग क्या होंगे—? झलकेगा इनमें कौन सा रूप झूठ बोलेगा,सच होगा चुप उपहासें या खिलखिलाहटें हँसी के रंग क्या होंगे—? फ़सानें-अफ़सानें हज़ार बातें मुद्दों का मसला नज़र नहीं आता किसलिए ये भागमभाग है मची कोई फ़ैसला नज़र नहीं आता तो,समय के रंग क्या होंगे—? ज़िन्दग़ानी ऐसी,सबब क्या– वक़्त म... »

द्वय–वय–जीवन उत्कृष्ट विभूषित

हृदय–पटल पर नृत्यमय नुपुर झनक से झंकृत हूँ विस्मित मैं मधु-स्वर से विह्वल अभिराम को आह्लादित तिमिर अंतस को कर धवल— कनक–खनक करके उज्जवल सारंग–सा हो भाव प्रज्जवलित सोम–सुधा सा रुप लक्षित दृग–कामना भी छलक रही— पलक पर व्याकुलता थिरक रही विधु–विनोद–अनुराग मिश्रित गुण–प्रभा इला चंचला सुसज्जित प्रखर–सौन्दर्य अपूर्व–अनुपम आलिंगन को प्... »

ज़िन्दगी……|

है ज़िन्दगी कहीं हर्ष,कहीं संघर्ष कभी दुःखों की अवनति,कभी खुशियों का उत्कर्ष ऐश्वर्य है ज़िन्दगी,कहीं है ज़िन्दगी परिश्रम ज़िन्दगी का अर्थ लगाना ही–है मन का भ्रम कहीं ज़िन्दगी बन जाती प्यार,कहीं नफ़रत मानवता का पर्याय कभी-सत्संगों की चाहत आशा की पूनम रात ,कभी निराशा की अंधियारी भावनाओं की बहार है ज़िन्दगी ,कभी अकेली बेचारी कठिनाईयों की दीवार ,कभी परेशानियोंकी पहाड़ शीतल छाया, कभी बसंत,कभी पत... »

तेरे संघर्ष की लड़ाई

—————————- यूँ थककर ना बैठ मुसाफ़िर अभी तेरी मंज़िल नहीं आई शायद–चलेगी कुछ देर और तेरे संघर्ष की लड़ाई………. थककर यूँ बैठ गए अगर— राहे भी आसान ना होगी ज़मानें की रुसवाईयाँ भी– राहों की पहचान ना होगी वक़्त का पहिया घूम रहा घर्र-घर्र सच्चाई–अच्छाई से मेहनत सजकर क़दम हो अगर बिश्वास भरा— मंज़िल तुम्हें ... »

सवालों के अंगारे

———————– धधक रहा है मन में सवालों के अंगारे— सच है कौन-?झुठ है क्या-? मन में जो भ्रम पल रहे, या, आँखों से दिखते नज़ारे किस क़दर समझुँ– और, क्या समझाऊँ दिल को या, तन्हा जानुँ महफ़िल को–? क्या सोचती दुनियाँ– और,क्या बोलती बोलियाँ कौन जुड़े हैं दिल से– कितनें जुटे मुश्किल से क्या कहूँ–बहते नीर से या,शिक़वा तक़दीर से&#... »

मैं ही रहूँगा…..

——————— तेरे दिल में याद बनकर समा जाऊँगा तेरी आँखों में नशा बनकर छा जाऊँगा कशिश की सरहद से दूर ना जा पाओग मैं खुशबू बनकर एहसास की———– ———–तेरी साँसों में घुल जाऊँगा ये तो सांसारिक बातेें हैं, कि….. मैं तुम्हारा रहा नहीं कभी– लेकिन— ख़्वाबों–ख़्यालों से छुड़ाओगे तुम पीछा कैसे—-? &... »

श्रृंगार की रचना

सारे सितम भुल जाऊँ इतना प्यार देना मुझे हर जख़्म भुल जाऊँ इतना प्यार देना मुझे तेरा एतबार औरों से ज़ुदा है निगाहों में उम्मीद तु दिल से ख़ुदा है मुस्कुराना थोड़ा सीख जाऊँ इतनी हँसी देना मुझे तेरे आग़ोश में मिल जाएँगे रत्न सारे सागर के तेरा भरोसा ही पतवार जैसा पार करेगा मुझे– तेरी संतात्वना ही संजीवनी जी पाऊँगा जी भर के सारे दर्द को सह जाऊँ इतना इक़रार देना मुझे सारे जख़्म भुल जाऊँ इतना प्यार... »

अब तो संभलो

स्वार्थ के हर रंग मेें रंग गया है दिल…..देखो और मुस्कुराकर कह रहें हैं— ये दुनियाँ कितनी रंगीन है……!! “मतलब” के रस्से से अब बँध गया है तन…….देखो प्यार के वो कच्चे धागे मिल नहीं रहें हैं , आज महंगाई से मामला ग़मग़ीन है……!! औपचारिकता के रोग लगें हैं- हर लोग यहाँ बीमार हैं डॉक्टर भी पड़ा है शय्या पर- अपनें-अपनें दर्द में लीन हैं……... »

Kaisaa safar– kis manzil mei..!

————————————————- Imaan ka daawaa kar sakte nhi Beimaano ki mehfil mei Lakh chaho mumkin nhi taraqqi Gandagi gr man mei-kapat dil mei Har surat ab dikhaawey ka– Seerat bhi dhumil ho gayi hai Saboot-saboot ke chakkar mei– Bechari sachchai parri musqil mei Vaachaal ho gyi duniyaan– Bishw... »

Kaisa hoga apna Hindustan….!!

Suno–sunaai degi tumhe– Bharat maa ki chittkaar Lahoo bahe– jo mere beto ke Kyu hota ja rahaa bekaar…?? Shahaadat mere laal ki Chup pattharro mei simat gyi hai Mujhpar mar mitna mere bachcho ka– Kyu sirf kahaani bankar rah gyi hai.?? Kya sochkar wey hue the qurban Ki-Aisa ho jayega apna Hindustan…..??? Raajneeti ki bayaare—- Dishaaheen bahaa karengi…... »

Chand panktiyaa

Duniyaa bhar ki khushiya hain Prr,mere hotho pe muskan nhi Naam jitnaa bhi baraa ho mera Tum bin koi pehchaan nhi Tarrapte dil ki aawaz to suno Tumse pyar mangaa hai,ehsaan nhi Sawar jayegi zindgani-tumhe pataa hai Aitbaar tera chaahiye–ye jahaan nhi Phirr to muskuraane lgrnge gam-e-ranjit Khushgawaar saath tera ho–ye zami aasamaan nhi….. –Ranjit Tiwari “Munna” »

Kaisa hoga apna Hindustan….!!

Suno–sunaai degi tumhe– Bharat maa ki chittkaar Lahoo bahe– jo mere beto ke Kyu hota ja rahaa bekaar…?? Shahaadat mere laal ki Chup pattharro mei simat gyi hai Mujhpar mar mitna mere bachcho ka– Kyu sirf kahaani bankar rah gyi hai.?? Kya sochkar wey hue the qurban Ki-Aisa ho jayega apna Hindustan…..??? Raajneeti ki bayaare—- Dishaaheen bahaa karengi…... »

Swarth

Socho us baago ki haalat Viraani mei tarrapte hue Khilti kaliyo ko tarse– Hariyali ko tarrapte hue Nigaahein bhi tann jati ambar pr Ekk ummid liye– Dekha tha khwab kabhi– Saawan ko baraste hue—- Armaan hui hogi ki- khile gul se vaadiya mahkaayenge Papihe ki pihu–koyal ki kook se hogi daawate Har shay pe raaj hoga hariyali ka Jhoomte vasant mei khilte bahaar ko bulwaay... »

Kaun jaantaa hai

Kaun jaantaa hai…..!!! Ki,shaant saagar kabhi-kabhi Ek tufaan lataa hai Phir,kya hotaa hai—-?? Akalpniy lamhe………….. Soch se pare pal Jeevan mei bhi kabhi-kabhi Aate hain aise hi tufaan Vivek se pare ho jaate lamhe Gir jaate soch ke mahal Aur,dhah jataa dhairya ka makaan Phirr……………….. Shaant ho jataa sabkuchh Shoonya—-bee... »

Aei Mann Mere

Aei Mann mere………….! Mtt ho niraash…… Jalaay rakh chiraag, Antah:mnn ki– Banaay rakh aas……. Yun patjharr ki baichaini Mtt samajh ise, Niyati ka paash…. Torkarr saare bandhan, Chhayenge bahaare Aayega basant tere paas…… Jo gharri hai tumhara abhi Hai daiv ka koi tamas Hain jo khoye hue nazaare Karti kabhi-kabhi ishaare Door hong... »

………….nhi thakkti

Ashru-purit nayan mere kyu—? Raah tumhari takte nhi thakkti Shunya matra bin tere jivan ke pal “Preet” hamaari kahte nhi thakkti Manuhaar dil ki,sune tera dil bhi ‘Ummidein’ dil ki sahte nhi thakkti Gudgudate Mnn ko,Milan ke kshan Jo “Yaadein”us pal ki- haste nhi thakkti Hriday vihwall punarmilan ki chah mei- Aahlladit bayaar bahte nhi thakkti Krr aalingan... »

WO—-

(Jawaa Dilo ke dharrkan aur ehsas ko chhone ka prayas : ek shringaar rachna.)——– WO—- ——— WO…….. Muskuraa rahi–yun door se hi Kbb qarib aayegi…… Intezaar mei ,pal guzar rahe Lamhe bhi beqaraar ho rahe Sapno ki chilmann se nihaarti, Muskuraati mujhe sataa rahi Jhalak–jhalak si door se hi—- Kbb qarib aayegi—... »

Aaj khush ho rahe hain…

Karke naadaani…. Aaj khush ho rahe hain Jhelte pareshani- Aaj khush ho rahe hain Chhorr kar pehchan ki- Sabhi nishaniyaa Badh rahi hai naitikk baimaaniyaa Bannkarr ADHURE gyaani Aaj khush ho rahe hain Bhatakk rahe pashchyat ki galiyo mei Palash ke dikhawati phool chunn rahe Taras rahi bhartiyata– lagaane ko gale Pichhe hatate jo-unki kadam choom rahe Karke khud se khichaataani Aaj khus... »

Kuchh yaadein..

Ek waadaa phir Milne ka bs wada bhr rah jate hain Bah jata hai samay ka dariya wo udhar- hum idhar rah jate hain Nikal jate hai door bahut pichhe ojhal saare ho jate hai Prr jati hai dhul yaado pr khandahar nazaare ho jate hai Ujarr jati hai duniya sb registaan sa ho jata hai Tadipaar ho jati khushiya,hara-bharaa sb viran ho jata hai Haqiqat fasaanaa ho jata hai,atit ban jataa hai Itfaaq ki mitha ... »

Ummidein kuchh bayaa kar rahi hai

Ummidein kuchh bayaa kar rahi hai Kashishe abb jawaa ho rahi hai Ho rahaa hai intezaar ka lmha deewana Nigaahe jaane kya nihaar rahi hai Jhanak-jhanak si aahate pajeb ki Purwaayee mehandi ki Sugandh bahaa rahi hai Karr shringaar vasant- bela mei ‘sukomal’ Khilte ehsaas mei samaa rahi hai.. »

Koi ” aabhaas” mujhko chhuaa hai

Koi ” aabhaas” mujhko chhuaa hai Lgtaa hai aapka aanaa hua hai Khwabo ki dhundhlaahat kamm hui Haqeeqat abb fasaanaa hua hai Sisakti tannhai bhi hass parri hai Nazaro mei aks ka uterna hua hai Tasalli ne bhi diya- dil ko “yakinn” Intezaar mei barso gujarnaa hua hai Izhaar ko machalne lagi kashishe bhi soona jivan abb suhaanaa hua hai »

SOONAA AANGAN–AASMAAN KA

———————————————————- aii kash— ki, sabhi bachche hote sang hote aur sachche hote kyu badh gye— jawaan ho gye khudd se hi anjaan ho gye kya rang the bachpan ke haatho mei haath– kandhe pe haath muskaan saath mei pal–pal kadd kya badhaa–(?) nashaa hi chadhaa... »

WO sitam karte-karte choor ho gye

WO sitam karte-karte choor ho gye Hum sahte- sahte mashahoor ho gye Lgg gyi hai aadat sahne ki hame Ya apni aadat se wo mazboor ho gye Her taraf jo aalam tha— kaise kahe Apni zindgani se hum door ho gye Kya samjhenge dard ko sitam karne wale Zakhm aise nikale ki naasoor ho gye Tamannao ki angrayi li thi ranjit dil ne bhi Malik banne chalaa tha– mazdoor ho gye »

Hum wafaa ki chah mei,wafaa karte gye

Hum wafaa ki chah mei,wafaa karte gye Intezaar ke ghoont thahar-thahar kr pite gye Wo boli na kuchh bhi- yu muskurati rahi Bss muskan ki gahraaii mei Hum uterte gye Tmannaye machalne lgi,kashishe jgne lgi Khushi ki aahat Jaan hum baichain hote gye Pr soch ko pataa n tha,jo mere sath huye Raat bitati gayi,aurr sapane tutate gye »

TANNHAAII

baithaa huaa thaa main niruttar sa hokarr– ki,kisi ki aawaaz aayee puchha — to kahaa main hu ” Tanhaai”—aapka sath nibhaane ko aayee shunytaa si hotho pe khillkhilaahat ne dhakk jamaaii hasi aayee— kahaa Maine tum to khudd ho tannhaaii tanhaa ho– phirr sath kaise(?) aaj tkk tanhaaii ne —– kahaa kisi ki saath nibhaii Jo khudd ho akela, kaise lga... »

mera mehboob mera sanam hai…

SHRINGAAR KI EK RACHNAA ———————————————————- mera mehboob mera sanam hai…I —————————————————– saawan ka baadal—— hai unke aankho ka kaajal mayur sa mnn hai nrit... »

MAANAVTAA KI SAHI KAHAANI HOGI

Chhtpataa rahi insaaniyat haivaaniyat ke quaid mei- sisak…rahaa bhaaichaaraa bddniyatee ke aeib mei. khoon ki qeemat nhi…(?) wo to, bss dikhne mei laal hai hrr koi ek-duze ko jhhpattne ki saazisho mei hi bss behaal hai tohfaa biawasghaat ka — bddniyatee ki bazaar se lete prem viheen maahaul,mei dekho hrr koi sirf laachaar se hai dikhte hrrpnaa–hrrppnaa–aurr hrrppnaa m... »

JAANE KYU … ??

Jaane kyu———–?? logg yahaa pe hote betab,saath paane ko ye zindagi to hai kewal aane–jaane ko sunaa hai Maine buzurgo se padhaa hai Maine grantho mei aana–jaana akelaa hotaa hai phir,kis baat ka mela hotaa hai?? kahte hai logg mayaa hai ye pr ye kaisi maaya——-?? aur’ kaisi maayaa ka sansaar ki– hrr pal– hrr koi– sangg paane ko... »

Arz hai ……

Arz hai …… Aapas mei hi sbb footne lage hain Ekk- doosare ko lootne lage hain.. Auro se abb drr kahaa lgtaa hai–?? Apne hi apno prr bhaukkne lage hain. Lajaane lagi hai lajja bhi.. Faishon ko nangaa hote dekh. Bilakhne lagi hai shraddha bhi. Aastha mei pangaa hote dekh.. In haalaato mein abb to….. ..aansu bhi aankho ke sookhne lage hain….. »

HEY….! BHAARAT BHOOMI

Hey Bhaarat bhoomi— kyu sooni– sooni aaj teri pehchaan hai fiki fiki si shaan hai pehle tu gulaam thi— aaj ho rahi neelaam hai- kataare lambi ho rahi hai sattaa ke deewano ki– bhesh majnoo ke badal rahe roop lailaa ke parwaano ki ye sach hai– ki tu mahaan hai par aaj, ho rahi baddnaam hai raajneeti ke maayne– dohari roop le rahi hai khel ho ya chaal ho alagg swa... »

YAD RAHEGA UN VEER SAPOOTO KA BALIDAAN

Shahaadatt ki Lekhni se ——— likhi gyi Aazadi ki daastaan Yaad rahega un veer sapooto ka balidaan katra– katra khoon se seenchee mitti Hindustan ki badhte gye aage hrrdm— parwaah kiye binaa Jaan ki zarrra– zarrra vatan ka maanega ehsaan yaad rahega un veer sapooto ka balidaan Maao me doodh ki taaqat bahno me aanchal ki himmmat patniyo ke pyaar ki daulat veeraangn... »