5 Comments

    1. आभार सुमितजी।नदी और जीवन सूक्ष्म से विराट होने की जिजीविषा की अलौकिक कथा–यात्रायें हैं———परोपकार की अक्षुण्ण पावन भावना के द्योतक।विपरीत परिस्थितियों में ढलने और अपना रास्ता बनाने की संघर्ष कथायें।अनुभव की ज़मीन बहुत पथरीली जो होती है।

    1. धन्यवाद अंजलिजी।नदी और जीवन दोनों ही परोपकार की संघर्ष यात्राऐं हैं।अनुभवों का अनहद सफ़र।आपको इस शौर्ययात्रा ने आन्दोलित किया ; रचना की सफलता इसी में निहित है।आभार आपका।

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