बूंदें टपक रही हैं नभ से
सावन आया है जब से
कोपल फूटी है चाहत की
सावन आया है जब से।
जिनकी राहें देख रहे थे
मेरे नयन उन्हीं ने आकर
पूरा घेर लिया मन तब से
सावन आया है जबसे।
कविता निकल रही है लब से
सावन आया है जब से,
उनसे बढ़ने लगी करीबी
सावन आया है जब से।
सूखे सूखे रहते थे हम
मन मे रहते ही थे कुछ गम
अब तो खुश रहते हैं हम
सावन आया है जब से।
सावन आया है जबसे
Comments
3 responses to “सावन आया है जबसे”
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मन मे रहते ही थे कुछ गम
अब तो खुश रहते हैं हम
सावन आया है जब से।
_______सावन के आगमन पर चारों ओर हरियाली और ख़ुशी का वातावरण हो जाता है, यही सुन्दर सन्देश देती हुई कवि सतीश जी की बहुत ही सुन्दर भाव और सुन्दर शिल्प सहित बहुत ही मधुर कविता -
उत्तम सृजन
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बहुत खूब
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