इस काँच में कहाँ से आई दरारें?
उस रात जब जोर से आँधी आई थी
तब खिड़कियाँ आपस में गले थी।
और चीख-चीख कर
अपने मिलन की खुशी
प्रकट कर रही थी और
सावन के आगमन का
उत्सव मना रही थी।
शायद उसी रात, उसी बरसात में
इन खिड़कियों के काँच में आ गई थीं दरारें।