सावन का उत्सव

इस काँच में कहाँ से आई दरारें?
उस रात जब जोर से आँधी आई थी
तब खिड़कियाँ आपस में गले थी।
और चीख-चीख कर
अपने मिलन की खुशी
प्रकट कर रही थी और
सावन के आगमन का
उत्सव मना रही थी।
शायद उसी रात, उसी बरसात में
इन खिड़कियों के काँच में आ गई थीं दरारें।

Comments

12 responses to “सावन का उत्सव”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    सुन्दर

  2. Geeta kumari

    सुंदर

  3. सुंदर प्रस्तुति

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