साज़

टूट गई साँसों की माला जैसे कोई साज,
सुनी नहीं किसी ने मेरे दिल की वो आवाज़,
बन्द हुए जब अंत समय में आँखों के मेरे काज,
उड़ गए मेरे पंख पखेरू जैसे कोई बाज़।।
राही (अंजाना)

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