2 Comments

  1. बन जायें खुशियाँ साजन सी, मैं बन जाऊँ वनिता।
    कानों में हो मधुर मधुर धुन, ऐसी सुना दे कविता
    ______ कवि सतीश जी की पद छंद शैली में रूमानियत भरी हुई बहुत ही मधुर रचना….लाजवाब अभिव्यक्ति

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