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  1. कुछ लोग जहां के पूजन करते
    और करते हैं अपमानित कोई।
    ऐसा होना था। ये पद्य विधा है। यहाँ एक शब्द के अनेक अर्थ होते हैं। शब्दों की, वर्णों की ,मात्राओं की, पद की, अलंकार की, रस की, अर्थ की और भाव की एक मर्यादा होती है। दुनिया हमें कवि कहती है, मैं तो अपने आप को कवि नहीं शब्द साधक मानता हूं।
    कवि कहाने वाले गुण कहाँ मुझ में। अस्तु।।

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