हमें कितना सताया जा रहा है
हमारा खूं बहाया जा रहा है
लिए फिरता है वो तरकश जुबां में
जिसे गूंगा बताया जा रहा है
मेरी खामोशियां सिसकी में बदली
हमारा मुंह दबाया जा रहा है
बदन की आरजू का भूखा है वो
जिसे सीधा बताया जा रहा है
है गर जिंदा खुदा हमसे मिले फिर
बुतों को क्यों नचाया जा रहा है
नपुंसक हैं हवस के जब पुजारी
भागवत क्यों सुनाया जा रहा है
हमें मर्यादा में रहकर है चलना
हमें ही बेंच खाया जा रहा है
गई थी मायके उम्मीद लेकर
हमें वापस लौटाया जा रहा है
हैं गर मां बाप ही मेरे खुदा तो
उन्हें बहरा बताया जा रहा है
कचहरी तक चली थी पांव नंगे
दलीलों को दबाया जा रहा है
गुनाह उसने किया उसको है माफ़ी
हमें दोषी बताया जा रहा है
जिसे शैतान कहना चाहिए था
उसे स्वामी बताया जा रहा है
हमारे घाव पर मिर्ची लगा कर
हमें ही नोच खाया जा रहा है
चलो अब चैन की सांसें भरूंगी
हमारा शव जलाया जा रहा है ।
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