हम भूल भी नहीं सकते वो बाते।

भंवरा अंधेरा छोड़ा है, लेकिन वो परछाई नहीं।
पागल बना है दर दर भटकने से, लेकिन हरजाई नहीं।

Comments

2 responses to “हम भूल भी नहीं सकते वो बाते।”

  1. बहुत खूबसूरत कविता 

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