हरसिंगार

हरसिंगार
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रात भर महकता, संवरता करता इंतजार,
तड़प कर बिखर जाता धरा पर ….
होकर बेकरार।
खिल जाती धरा,
मुस्कुराकर कहती
आओ केसरिया बालम
हरसिंगार!

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