हर अवसर भुनाना होगा

हर अवसर भुनाना होगा
मौका मिलेगा तुझे भी
एक दिन मुश्किल से
उसे बस कस कर लपकना होगा।
हो अगर कंटक युक्त झाड़ी तो
बीच में फूल बनकर
महक के साथ महकना होगा।
उदासी फेंक कर
कुछ दूर अपने से तुझे,
जिगर मजबूत कर हँसना होगा।
राह भटका रहे कारक
नजरअंदाज कर,
तुझे मंजिल की सीढ़ी में
युवक चढ़ना होगा।
मैं नहीं हार मानूँगा
न विचलन ही रखूँगा,
सफल होंगे कदम मेरे
तुझे कहना होगा।
हर अवसर भुनाना होगा
मौका मिलेगा तुझे भी
एक दिन मुश्किल से
उसे बस कस कर लपकना होगा।

Comments

3 responses to “हर अवसर भुनाना होगा”

  1. बहुत प्रेरक रचना

  2. Geeta kumari

    जिगर मजबूत कर हँसना होगा।
    राह भटका रहे कारक
    नजरअंदाज कर,
    तुझे मंजिल की सीढ़ी में
    युवक चढ़ना होगा।
    मैं नहीं हार मानूँगा
    __________ युवा वर्ग को प्रोत्साहित करती हुई कवि सतीश जी की बहुत ही श्रेष्ठ रचना। उत्तम शिल्प और भाव सहित अति उत्तम लेखन

  3. उच्च स्तरीय रचना

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