हर दम रहें वो अच्छे

कैसे हो पूछता हूँ
कहते हैं खूब अच्छे
हर बार पूछता हूँ,
कहते हैं खूब अच्छे।
भीतर का दर्द जो है
वो भी बता न पाए
हम भी न पूछ पाये
बस बोल बोलने हैं
दो बोल बोल आये।
कैसे हैं क्या पता वो
ज्यादा न पूछ पाये।
दायरे बने हैं सबके
दायरे में हम घिरे हैं,
बस मन से चाहते हैं,
हर दम रहें वो अच्छे।

Comments

One response to “हर दम रहें वो अच्छे”

  1. बहुत सुन्दर लिखा है

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