हर शाम इतनी मीठी ना होती,
अगर तुम ना होते ,
खुश तो होते हम,
पर खुशनसीब ना होते,
गुजारिश है बस इतनी तुमसे,
इस मुस्कान को खोने मत देना,
खुशनुमा किया है हृदय को,
तो कभी इसे रोने मत देना।
हर शाम इतनी मीठी ना होती
Comments
10 responses to “हर शाम इतनी मीठी ना होती”
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सुन्दर
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धन्यवाद जी
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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धन्यवाद जी
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श्रृंगार रस से परिपूर्ण अति सुंदर रचना
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Thank you ma’am
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बहुत खूब
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धन्यवाद सर
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very nice
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धन्यवाद
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