हर शाम इतनी मीठी ना होती

हर शाम इतनी मीठी ना होती,
अगर तुम ना होते ,
खुश तो होते हम,
पर खुशनसीब ना होते,
गुजारिश है बस इतनी तुमसे,
इस मुस्कान को खोने मत देना,
खुशनुमा किया है हृदय को,
तो कभी इसे रोने मत देना।

Comments

10 responses to “हर शाम इतनी मीठी ना होती”

    1. धन्यवाद जी

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar

    बहुत सुंदर पंक्तियां

    1. धन्यवाद जी

  2. Geeta kumari

    श्रृंगार रस से परिपूर्ण अति सुंदर रचना

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