हलधर की व्यथा सुनने को
नहीं है वो तैयार
जिसने बनाई थी नीतियाँ
किसानों के लिए अपार
किसानों के लिए अपार
नीतियाँ बनाकर बैठ गये बंगले में
और गरीब किसान बैठ गये धरने में
धरना देकर भी उनके कुछ
हाँथ ना आया,
इस सरकार ने कितना निर्धन जन को सताया।।
हलधर की व्यथा सुनने को
नहीं है वो तैयार
जिसने बनाई थी नीतियाँ
किसानों के लिए अपार
किसानों के लिए अपार
नीतियाँ बनाकर बैठ गये बंगले में
और गरीब किसान बैठ गये धरने में
धरना देकर भी उनके कुछ
हाँथ ना आया,
इस सरकार ने कितना निर्धन जन को सताया।।