“हलधर की व्यथा”
हलधर की व्यथा सुनने को
नहीं है वो तैयार
जिसने बनाई थी नीतियाँ
किसानों के लिए अपार
किसानों के लिए अपार
नीतियाँ बनाकर बैठ गये बंगले में
और गरीब किसान बैठ गये धरने में
धरना देकर भी उनके कुछ
हाँथ ना आया,
इस सरकार ने कितना निर्धन जन को सताया।।
किसानों पर आधारित सुंदर रचना
हलधर की व्यथा सुनने को
नहीं है वो तैयार
जिसने बनाई थी नीतियाँ
किसानों के लिए अपार
किसानों के लिए अपार
नीतियाँ बनाकर बैठ गये बंगले में
और गरीब किसान बैठ गये धरने में
धरना देकर भी उनके कुछ
हाँथ ना आया,
इस सरकार ने कितना निर्धन जन को सताया।।
इस कविता के माध्यम से आपने दि
खा दिया कि आप
कितनी बोल्ड लेडी हो..
जिसका मन पीडि़त जन के लिए
तड़प उठता है और सच कहने के लिए
सरकार के विरुद्ध खड़ा हो जाता है..
जिसे वर्तमान सरकार के व्परीत जाने
का भी कोई डर नही..
हमेशा कि तरह आपकी यह कविता पढ़कर
मेरे मन को आन्नद प्राप्त हुआ तथा
किसान की वेदना का भी एहसास हुआ..
नीतियाँ बनाकर बैठ गये बंगले में
और गरीब किसान बैठ गये धरने में
धरना देकर भी उनके कुछ
हाँथ ना आया,
इस सरकार ने कितना निर्धन जन को सताया।।
आप हमेशा किसानों और समाज के पीडित
जनों की बात करती हैं जैसे श्रेष्ठ कवि किया
करते थे, आप ऐक सफल साहित्य साधक हैं
मुझे बहुत प्रसंनता हुई
यह कविता पढकर…