“हलधर की व्यथा”

हलधर की व्यथा सुनने को
नहीं है वो तैयार
जिसने बनाई थी नीतियाँ
किसानों के लिए अपार
किसानों के लिए अपार
नीतियाँ बनाकर बैठ गये बंगले में
और गरीब किसान बैठ गये धरने में
धरना देकर भी उनके कुछ
हाँथ ना आया,
इस सरकार ने कितना निर्धन जन को सताया।।

Comments

3 responses to ““हलधर की व्यथा””

  1. Geeta kumari

    किसानों पर आधारित सुंदर रचना

  2. jeet rastogi

    हलधर की व्यथा सुनने को
    नहीं है वो तैयार
    जिसने बनाई थी नीतियाँ
    किसानों के लिए अपार
    किसानों के लिए अपार
    नीतियाँ बनाकर बैठ गये बंगले में
    और गरीब किसान बैठ गये धरने में
    धरना देकर भी उनके कुछ
    हाँथ ना आया,
    इस सरकार ने कितना निर्धन जन को सताया।।

    इस कविता के माध्यम से आपने दि
    खा दिया कि आप
    कितनी बोल्ड लेडी हो..
    जिसका मन पीडि़त जन के लिए
    तड़प उठता है और सच कहने के लिए
    सरकार के विरुद्ध खड़ा हो जाता है..
    जिसे वर्तमान सरकार के व्परीत जाने
    का भी कोई डर नही..
    हमेशा कि तरह आपकी यह कविता पढ़कर
    मेरे मन को आन्नद प्राप्त हुआ तथा
    किसान की वेदना का भी एहसास हुआ..

  3. vivek singhal

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