हाथ की रेखाओं को

हाथ की रेखाओं को क्यों बदनाम करते हो
खुद ही हर सुबह को क्यों शाम करते हो

पशेमाँ होके न बैठेगा ये बेदर्द जमाना
आप बेवजह बैठे क्यों जाम भरते हो

किसको फुर्सत जो देखे चाकजीगर
शिकायत फिर क्यों खुलेआम करते हो

हर फ़तेह तेरा खुद का मुक़द्दर
हर शिकस्त मेरे क्यों नाम करते हो

जब कोई मरासिम नहीं रहा फिर
दूर से देख के क्यों सलाम करते हो

राजेश’अरमान’

Comments

8 responses to “हाथ की रेखाओं को”

    1. rajesh arman Avatar
      rajesh arman

      thanx

    1. rajesh arman Avatar
      rajesh arman

      thanx

  1. Amit tanwar Avatar
    Amit tanwar

    wah g wah bah kmaal …..

    1. rajesh arman Avatar
      rajesh arman

      thanx

  2. Abhishek kumar

    Good

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