हार

तेरे बाहों के हार में, सब कुछ हार जाऊं।
तुझ पर अपना दिलो – जां मैं वार जाऊं।
तुझ से हार कर भी जीत है मेरी ‘देव’,
तेरे आगोश में, जन्नत का मैं करार पाऊं।

Comments

6 responses to “हार”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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