देवेश साखरे 'देव', Author at Saavan's Posts

ज़रिया

बूँद-बूँद से मैं दरिया बन जाऊँ। तिश्नगी का मैं ज़रिया बन जाऊँ। डूबाने की मंशा बिलकुल नहीं है, ज़िन्दगी का मैं नज़रिया बन जाऊँ। देवेश साखरे ‘देव’ »

मकर संक्रांति

यूं तो भारतवर्ष, कई पर्वों त्योहारों का देश है। भिन्न बोली-भाषाएं, खान-पान, भिन्न परिवेश है। आओ मैं भारत दर्शन कराता हूं। महत्त्व मकर संक्रांति की बताता हूं। सूर्य का मकर राशि में गमन, कहलाता है उत्तरायण। मनाते हम सभी इस दिन, मकर संक्रांति का पर्व पावन। दक्षिणायन से उत्तरायण में सूर्य का प्रवेश है। यूं तो भारतवर्ष, कई पर्वों त्योहारों का देश है।। गुजरात, उत्तराखंड में उत्तरायण कहते। इस दिन पतंग प्... »

नसीहत

इस भीड़ अपार में, सैकड़ों – हजार में, ढूंढ पाना है मुश्किल हमसफर, छिपा होता है दुश्मन यार में। नहीं होता जहां में कोई अपना, साथ छोड़ देते सभी मझधार में। करते हैैं साथ निभाने का वादा, पर दिल तोड़ते हैं एतबार में। गर पूछे कोई, देगा यही नसीहत ‘देव’, कभी दिल ना लगाना प्यार में। देवेश साखरे ‘देव’ »

शायद

मैं उससे प्यार करता हूँ, पर इजहार से डरता हूँ। कभी-कभी मैं सोचता हूँ, मुझसे भी प्यार वो करती होगी शायद। दौड़कर खिड़की पर आना, मुझे देख प्यार से मुस्कुराना। कभी-कभी मैं सोचता हूँ, मेरे इंतजार में राह वो तकती होगी शायद। वो मेरी बातें सोचती होगी, रात आँखों में काटती होगी। कभी-कभी मैं सोचता हूँ, इकरारे-मोहब्बत से वो डरती होगी शायद। देवेश साखरे ‘देव’ »

नववर्ष

उम्मीदों की नई सुबह नववर्ष की। सुख – समृद्धि और उत्कर्ष की ।। आगे बढ़ते हैं, कड़वे पल भुला कर। छोड़ वो यादें, जो चली गई रुला कर। मधुर यादों के साथ, आओ नववर्ष का, स्वागत करें, उम्मीद का दीप जलाकर। बात करें मात्र खुशियां और हर्ष की। उम्मीदों की नई सुबह नववर्ष की । सुख – समृद्धि और उत्कर्ष की ।। आओ नववर्ष में होते हैं संकल्पित। जल की हर बूंद करते हैं संरक्षित। स्वच्छ वातावरण बनाने का प्रय... »

हवा का झोंका

हवा का झोंका जो तेरी ज़ुल्फे उड़ाता है। तुझे ख़बर नहीं मुझे कितना तड़पाता है।। हाथों से जब तुम ज़ुल्फे संवारती हो, कानों के पीछे जब लटें सम्भालती हो, तेरी हर एक अदा मेरी होश उड़ाता है। तुझे ख़बर नहीं मुझे कितना तड़पाता है।। हवा का झोंका जो तुझे छु कर आती है, तेरी खुशबू मुझे मदहोश कर जाती है, तेरी महक दिल के अरमान भड़काता है। तुझे ख़बर नहीं मुझे कितना तड़पाता है।। हवा का झोंका तेरी चुनर लहराती है, ... »

ख़तावार

कोई तो बताये कहाँ है वो, मुद्दत से उनका दीदार ना हुआ। तड़प रहा हूँ मैं दिन-रात, फिर कैसे कहूँ बेकरार ना हुआ।। हमें तो कब से है इंतजार, पर उन्हीं से इकरार ना हुआ। दिन को सुकून ना रात को चैन, फिर कैसे कहूँ प्यार ना हुआ।। जब सामने उसे पाया तो, खुद पे हमें एतबार ना हुआ। कुछ भी ना कह सका उससे, फिर कैसे कहूँ ख़तावार ना हुआ।। देवेश साखरे ‘देव’ »

फ़ासले

गमे-जुदाई किसी से बाँटी नहीं जाती। बगैर तेरे ये रातें अब काटी नहीं जाती। मिटा दो फ़ासले, जो हमारे दरम्यान है, गहरी कितनी खाई, जो पाटी नहीं जाती। देवेश साखरे ‘देव’ »

हादसा

तेरी दुआओं का असर है, वरना मैं तो मरने वाला था। एक हादसा जो टल गया, सर से जो गुजरने वाला था। जिंदा तो हूं पर हाथ नहीं है, वरना मांग तेरी भरने वाला था। आवाज तुमने भी दिया नहीं, वरना मैं तो ठहरने वाला था। ख़ैर, जहां भी रहो खुश रहो, जिंदगी नाम तेरे करने वाला था। देवेश साखरे ‘देव’ »

ज़िन्दगी आसान नहीं

ज़िन्दगी इतनी भी आसान नहीं, हर कदम मुश्किलों से लड़ना है, तो कभी हँस कर आगे बढ़ना है।। ज़िन्दगी एक जंग से कम नहीं, ख़ुद से, कभी गम से झगड़ना है, जीत अपने दम पर ख़ुद गढ़ना है।। यह जैसे सांप सीढ़ी का खेल है, कभी सांप का जहर सहना है, तो कभी सीढ़ी भी तो चढ़ना है।। उतार चढ़ाव का नाम है जिंदगी, कभी गहरी खाई में उतरना है, तो कभी बुलंदी पर भी चढ़ना है।। गुमराह करते हैं, लोग यहाँ पर, तलवार नहीं, क़लम पकड़न... »

Page 1 of 20123»