देवेश साखरे 'देव', Author at Saavan's Posts

ज़रिया

बूँद-बूँद से मैं दरिया बन जाऊँ। तिश्नगी का मैं ज़रिया बन जाऊँ। डूबाने की मंशा बिलकुल नहीं है, ज़िन्दगी का मैं नज़रिया बन जाऊँ। देवेश साखरे ‘देव’ »

मकर संक्रांति

यूं तो भारतवर्ष, कई पर्वों त्योहारों का देश है। भिन्न बोली-भाषाएं, खान-पान, भिन्न परिवेश है। आओ मैं भारत दर्शन कराता हूं। महत्त्व मकर संक्रांति की बताता हूं। सूर्य का मकर राशि में गमन, कहलाता है उत्तरायण। मनाते हम सभी इस दिन, मकर संक्रांति का पर्व पावन। दक्षिणायन से उत्तरायण में सूर्य का प्रवेश है। यूं तो भारतवर्ष, कई पर्वों त्योहारों का देश है।। गुजरात, उत्तराखंड में उत्तरायण कहते। इस दिन पतंग प्... »

नसीहत

इस भीड़ अपार में, सैकड़ों – हजार में, ढूंढ पाना है मुश्किल हमसफर, छिपा होता है दुश्मन यार में। नहीं होता जहां में कोई अपना, साथ छोड़ देते सभी मझधार में। करते हैैं साथ निभाने का वादा, पर दिल तोड़ते हैं एतबार में। गर पूछे कोई, देगा यही नसीहत ‘देव’, कभी दिल ना लगाना प्यार में। देवेश साखरे ‘देव’ »

शायद

मैं उससे प्यार करता हूँ, पर इजहार से डरता हूँ। कभी-कभी मैं सोचता हूँ, मुझसे भी प्यार वो करती होगी शायद। दौड़कर खिड़की पर आना, मुझे देख प्यार से मुस्कुराना। कभी-कभी मैं सोचता हूँ, मेरे इंतजार में राह वो तकती होगी शायद। वो मेरी बातें सोचती होगी, रात आँखों में काटती होगी। कभी-कभी मैं सोचता हूँ, इकरारे-मोहब्बत से वो डरती होगी शायद। देवेश साखरे ‘देव’ »

नववर्ष

उम्मीदों की नई सुबह नववर्ष की। सुख – समृद्धि और उत्कर्ष की ।। आगे बढ़ते हैं, कड़वे पल भुला कर। छोड़ वो यादें, जो चली गई रुला कर। मधुर यादों के साथ, आओ नववर्ष का, स्वागत करें, उम्मीद का दीप जलाकर। बात करें मात्र खुशियां और हर्ष की। उम्मीदों की नई सुबह नववर्ष की । सुख – समृद्धि और उत्कर्ष की ।। आओ नववर्ष में होते हैं संकल्पित। जल की हर बूंद करते हैं संरक्षित। स्वच्छ वातावरण बनाने का प्रय... »

हवा का झोंका

हवा का झोंका जो तेरी ज़ुल्फे उड़ाता है। तुझे ख़बर नहीं मुझे कितना तड़पाता है।। हाथों से जब तुम ज़ुल्फे संवारती हो, कानों के पीछे जब लटें सम्भालती हो, तेरी हर एक अदा मेरी होश उड़ाता है। तुझे ख़बर नहीं मुझे कितना तड़पाता है।। हवा का झोंका जो तुझे छु कर आती है, तेरी खुशबू मुझे मदहोश कर जाती है, तेरी महक दिल के अरमान भड़काता है। तुझे ख़बर नहीं मुझे कितना तड़पाता है।। हवा का झोंका तेरी चुनर लहराती है, ... »

ख़तावार

कोई तो बताये कहाँ है वो, मुद्दत से उनका दीदार ना हुआ। तड़प रहा हूँ मैं दिन-रात, फिर कैसे कहूँ बेकरार ना हुआ।। हमें तो कब से है इंतजार, पर उन्हीं से इकरार ना हुआ। दिन को सुकून ना रात को चैन, फिर कैसे कहूँ प्यार ना हुआ।। जब सामने उसे पाया तो, खुद पे हमें एतबार ना हुआ। कुछ भी ना कह सका उससे, फिर कैसे कहूँ ख़तावार ना हुआ।। देवेश साखरे ‘देव’ »

फ़ासले

गमे-जुदाई किसी से बाँटी नहीं जाती। बगैर तेरे ये रातें अब काटी नहीं जाती। मिटा दो फ़ासले, जो हमारे दरम्यान है, गहरी कितनी खाई, जो पाटी नहीं जाती। देवेश साखरे ‘देव’ »

हादसा

तेरी दुआओं का असर है, वरना मैं तो मरने वाला था। एक हादसा जो टल गया, सर से जो गुजरने वाला था। जिंदा तो हूं पर हाथ नहीं है, वरना मांग तेरी भरने वाला था। आवाज तुमने भी दिया नहीं, वरना मैं तो ठहरने वाला था। ख़ैर, जहां भी रहो खुश रहो, जिंदगी नाम तेरे करने वाला था। देवेश साखरे ‘देव’ »

ज़िन्दगी आसान नहीं

ज़िन्दगी इतनी भी आसान नहीं, हर कदम मुश्किलों से लड़ना है, तो कभी हँस कर आगे बढ़ना है।। ज़िन्दगी एक जंग से कम नहीं, ख़ुद से, कभी गम से झगड़ना है, जीत अपने दम पर ख़ुद गढ़ना है।। यह जैसे सांप सीढ़ी का खेल है, कभी सांप का जहर सहना है, तो कभी सीढ़ी भी तो चढ़ना है।। उतार चढ़ाव का नाम है जिंदगी, कभी गहरी खाई में उतरना है, तो कभी बुलंदी पर भी चढ़ना है।। गुमराह करते हैं, लोग यहाँ पर, तलवार नहीं, क़लम पकड़न... »

नज़रे-करम

मोहब्बत की कर नज़रे-करम मुझ पर। यूँ ना बरपा बेरुख़ी की सितम मुझ पर। तेरी मोहब्बत के तलबगार हैं सदियों से, अपनी मोहब्बत की कर रहम मुझ पर। न मिलेगा मुझसा आशिक कहीं तुझे, तेरी तलाश कर बस ख़तम मुझ पर। तोड़ दे गुरूर मेरा, गर तुझे लगता है, पर ना तोड़ अपनी क़लम मुझ पर। एक तू ही है, नहीं कोई और जिंदगी में, आज़मा ले, पर ना कर वहम मुझ पर। देवेश साखरे ‘देव’ »

एहसास

मेरी एहसास तू है। मेरी हर सांस तू है। यहीं है, तू यहीं कहीं है, मेरे आस-पास तू है। मेरी जज़्बात तू है। मेरी कायनात तू है। कटे न एक पल तुझ बिन, मेरी दिन-रात तू है। तुझसे शुरू, तुझपे ख़त्म, मेरी तलाश तू है। मेरी एहसास तू है।। मेरा क़रार तू है। मेरा प्यार तू है। बंद आँखें, कर सकता हूँ, मेरा एतबार तू है। ख़ुद से ज्यादा यकीं तुझपे, मेरा विश्वास तू है। मेरी एहसास तू है।। मेरा ज़हान तू है। दिलो-जान तू है... »

तुम पास नहीं

वाह रे कुदरत तेरा भी खेल अजीब। मिलाकर जुदा किया कैसा है नसीब। जब सख्त जरूरत होती है तुम्हारी, तब तुम होती नहीं हो, मेरे करीब। सब कुछ है पास मेरे, पर तुम नहीं, महसूस होता है, मैं कितना हूं गरीब। या खुदा, ये इल्तज़ा करता है ‘देव’, वस्ले-सनम की सुझाओं कोई तरकीब। देवेश साखरे ‘देव’ »

नागरिक संशोधन बिल

ये कुछ नहीं गंदी राजनीति का किस्सा है। पता ही नहीं वो क्यों भीड़ का हिस्सा हैं। ये जो लोग सड़कों पर उतर आए हैं। असली चेहरा दुनिया को दिखाए हैं। शरणार्थी तो देश के नागरिक नहीं, पर नागरिक भी क्या देशभक्ति निभाएँ है। जो नागरिक हैं, उन पर तो कोई आँच नहीं, फिर बेवजह वो किस बात पर गुस्सा हैं। ये कुछ नहीं गंदी राजनीति का किस्सा है। पता ही नहीं वो क्यों भीड़ का हिस्सा हैं। बपौती समझ क्यों राष्ट्र संपत्ति ... »

अफ़सोस

किसी को देख, ना कर अफ़सोस । यूँ ना अपनी किस्मत को तू कोस । भले ही तन से नहीं हैं हम पास, भले ही ना ले सकूँ तुझे आगोश । पर मन तो एक दूजे के पास ही है, दिल की सदा सुन, ज़ुबां है ख़ामोश। ख़ुदा ने एक दूजे के लिए ही बनाया, आंखें मूंद, नज़र आएगी फ़िरदौस। देवेश साखरे ‘देव’ सदा- आवाज़, फ़िरदौस- स्वर्ग »

क्या लीजिएगा

कहिए हुज़ूर और क्या लीजिएगा। दिल तो ले चुके अब जाँ लीजिएगा। तुम्हें हमसे मोहब्बत है या फिर नहीं, फैसला जो भी लो बजा लीजिएगा। मेरी ज़ुबाँ पर बस एक तेरा ही नाम, नाम मेरा भी तेरी ज़ुबाँ लीजिएगा। डूब ना जाऊँ कहीं गम के पैमाने में, जाम आँखों से छलका लीजिएगा। खो ना जाऊँ ज़हाँ की भीड़ में कहीं, अपनी आगोश में समा लीजिएगा। ‘देव’ जीना मरना रख छोड़ा हाथ तेरे, गर साथ जीना हो तो बचा लीजिएगा। देवेश ... »

विरान सहरा

विरान सहरा, चढ़ता सूरज, और ये तन्हाई। दूर तक पानी का कोई निशान, देता नहीं दिखाई। शायद ये आखरी सफर है, बस हर पल तेरी याद आई। देवेश साखरे ‘देव’ »

गलतफहमी

तीरे-नज़र से दिल जार-जार हुआ। ऐसा एक बार नहीं, बार-बार हुआ। देख उनकी तीरे-निगाहें, ऐसा लगा, कि उन्हें भी हमसे, प्यार-प्यार हुआ। करीब आते, हकीक़त से वास्ता पड़ा, मोहब्बत नहीं, दिल पे वार-वार हुआ। जिंदगी की रहगुज़र में ‘देव’ अकेला, ना कोई हमसफर, ना यार-यार हुआ। देवेश साखरे ‘देव’ »

पूस की रात

फिर आई वो पूस की काली रात। मन है व्याकुल, उठा है झंझावात।। पत्तों से ओस की बूँदें टपकना याद है मुझे। आँखों से आँसूओं का बहना याद है मुझे। सन्नाटे को चीरती, तेज धड़कनों की आवाज़, ख़ामोश ज़ुबाँ, कुछ ना कहना याद है मुझे। हमारे मोहब्बत के गवाह थे जो सारे, नदारद हैं वो चाँद तारों की बारात। फिर आई वो पूस की काली रात। मन है व्याकुल, उठा है झंझावात।। कोहरे से धुंधला हुआ वो मंज़र याद है मुझे। चीरती सर्द हव... »

तिजारत बन गई है

तालीम और इलाज, तिजारत बन गई है। कठपुतली अमीरों की, सियासत बन गई है। मज़हबी और तहज़ीबी था, कभी मुल्क मेरा, वह गुज़रा ज़माना, अब इबारत बन गई है। लोग इंसानियत की मिसाल हुआ करते कभी, आज दौलत ही लोगों की इबादत बन गई है। धधक रहा मुल्क, कुछ आग मेरे सीने में भी, दहशतगर्दों का गुनाह हिक़ारत बन गई है। यहाँ कौन सुने दुहाई, कहाँ मिलेगी रिहाई, ज़ेहन ख़ुद-परस्ती की हिरासत बन गई है। देवेश साखरे ‘देव’... »

ज़िन्दगी रंगीन हो जाता

कर गुज़रता कुछ तो, ज़िन्दगी रंगीन हो जाता। जो किया ही नहीं, वो भी ज़ुर्म संगीन हो जाता। मैं क्या हूँ, ये मैं जानता हूँ, मेरा ख़ुदा जानता है, आग पर चल जाता तो, क्या यकीन हो जाता। कुसूर बस इतना था, मैंने भला चाहा उसका, काश ज़माने की तरह, मैं भी ज़हीन हो जाता। तोहमतें मुझ पर सभी ने, लाख लगाई लेकिन, ज़माने की सुनता गर मैं, तो गमगीन हो जाता। नशे में जहाँ है, मैं भी गुज़रा हूँ, उन गलियों से, सम्भल गया व... »

मार गई मुझे

तेरी अदाएँ, तेरी नज़ाकत मार गई मुझे। तेरी शोख़ियाँ, तेरी शरारत मार गई मुझे। बेशक मोहब्बत है, पर डरता हूँ इज़हार से, मेरी खामोशी, मेरी शराफ़त मार गई मुझे। मैं करना चाहता था, अकेले दिल की बातें, पर तेरे दोस्तों की, जमाअत मार गई मुझे। तेरी नज़रें बहुत कुछ कहना चाही मगर, मेरी नादानी, मेरी हिमाक़त मार गई मुझे। दिल चाहता है तेरी धड़कने महसूस करना, गले में तेरी बाहों की हिरासत मार गई मुझे। देवेश साखरे &#... »

ज़िन्दगी के फ़लसफ़े

मुद्दतें गुज़र जाती है, ज़िन्दगी के फ़लसफ़े समझते। जब जिंदगी समझ आती, हाथ वक्त ही नहीं बचते। खेल-कूद में बचपन बीता, जवानी मौज़-मस्ती में, फिर सारी उम्र वो, दूसरों के टुकड़ों पर ही पलते। बड़े-बुजुर्गों की समझाईश, या हो तजुर्बा ता-उम्र का, जो भी नसीहत दें, वो सभी अपने दुश्मन ही लगते। वक़्त गुज़र जाता है, पीछे पछतावा बस रह जाता, वक्त पे वक्त को समझते, काश वक्त के साथ चलते। देवेश साखरे ‘देव̵... »

ज़िन्दगी से अनबन

ज़िन्दगी से आज मेरी, हो गई कुछ अनबन। हमेशा अपनी कहती, कभी मेरी भी तो सून। ना ही दौलत मांगा, ना ही चाही शोहरत कभी, क्या मांगा तुझसे, बस पल दो पल का सुकून। कर लो सितम मुझ पर, जितना तेरे हद में है, ना हारा कभी मैं, ना ही हारने देगा मेरा जुनून। तुने अकेला कर दिया, फिर भी ना कोई गिला, मेरे चाहने वालों पर है, तुझसे ज्यादा यकीन। देवेश साखरे ‘देव’ »

सर्दी

रज़ाई ओढ़ जब चैन की नींद हम सोते हैं। ठण्ड की मार सहते, ऐसे भी कुछ होते हैं।। जिनके न घर-बार, ना ठौर-ठिकाना। मुश्किल दो वक़्त कि रोटी जुटाना। दिन तो जैसे – तैसे कट ही जाता है, रूह काँपती सोच, सर्द रातें बिताना। गरीबी का अभिशाप ये सर अपने ढोते हैं। ठण्ड की मार सहते, ऐसे भी कुछ होते हैं।। भले हम छत का इंतज़ाम न कर सकें। पर जो कर सकते भलाई से क्यों चूकें। ठंड से बचने में मदद कर ही सकते हैं, ताक... »

कोई भरोसा नहीं

मांगी थी चंद लम्हों की मोहब्बत, जो मुझे तुमसे कभी मिला नहीं। चंद लम्हों की ही यह जिंदगी है, जिंदगी का भी कोई भरोसा नहीं। क्या तुमसे मोहब्बत की उम्मीद करें, जिंदगी से या तुमसे कोई गिला नहीं। हम ही मोहब्बत के काबिल ना थे, जो हमें कभी, तुमसे मिला नहीं। लौटना मुश्किल, दूर तक चला आया, दो कदम भी साथ तुमने चला नहीं। देवेश साखरे ‘देव’ »

ज़माने का चित्र

देखो उभर कर ज़माने का कैसा चित्र आया है। कल्पना से परे भयावह कैसा विचित्र आया है। गले लगा कर पीठ में खंजर उतार दिया उसने, मैं तो समझा मुझसे मिलने मेरा मित्र आया है। साँस लेना है दूभर, फ़िज़ा में इतना ज़हर घुला, साँसे बंद हुई तो जनाज़े पर लेकर इत्र आया है। इंसानियत शर्मसार हो, कुछ ऐसा गुज़र जाता, जब भी लगता कि अब समय पवित्र आया है। चेहरे पर चेहरा चढ़ाये फिरते हैं, लोग यहाँ पर, रक्षक ही भक्षक बन बैठ... »

मज़बूरी

रूह काँप जाती थी सोचकर, बगैर तेरे रहना । आज ये आलम है, पड़ रहा गमे-जुदाई सहना । इसे वक्त की मार कहूँ, या मज़बूरी का नाम दूँ, गलत ना होगा, इसे जिंदगी की जरूरत कहना । किस दोराहे पर वक्त ने ला खड़ा कर दिया ‘देव’, कुछ वक्त ने, कुछ तुमने, सीखा दिया तन्हां जीना । देवेश साखरे ‘देव’ »

यकीं तुझे दिला न सका

तुझे पाकर भी मैं पा न सका। तेरे दिल में जगह बना न सका। सोचता हमारे बीच कोई ना होगा, जहां से अपना प्यार बचा न सका। जाने से पहले थोड़ा जहर ला देना, जिंदगी में किसी और को ला न सका। मुझे अपना कर तुझे जो मलाल है, इस बात का बोझ मैं उठा न सका। किस नाकारा से तुमने नाता जोड़ा, किसी सोच पर खरा उतर न सका। हो सके तो मुझे माफ कर देना, जिंदा लाश माफी मांगने आ न सका। कहीं प्यार समझौता ना बन जाए, समझौते को प्यार ... »

न्याय

ना कोई मुकदमा, ना कोई सुनवाई। ना कोई चीख पुकार, ना कोई दुहाई। तुरंत फैसला और मौके पर ही न्याय, दुष्कर्म के ख्याल से ही रूह काँप जाए। देवेश साखरे ‘देव’ »

इतना आसान नहीं

मोहब्बत को भूला देना, इतना आसान नहीं। फैसला सुना दिया, मैं कोई बेजुबान नहीं। मेरे सीने में भी दिल है, दर्द है, तड़प है, पत्थर तो नहीं, कैसे समझ लिया इंसान नहीं। अश्क सूख चुके, खून बहाया है तेरे वास्ते, इससे बढ़कर मेरी मोहब्बत का निशान नहीं। ये तो खून है, आज़मा लो दे सकते हैं जान भी, मेरी मोहब्बत से तो तू वाकिफ है अंजान नहीं। हंसते हुए दर्द का ज़हर पी जाऊं वो ‘देव’ नहीं, मैं भी तेरी तरह... »

मेरे बस की बात नहीं

तुम्हें भुला पाना, मेरे बस की बात नहीं, तुम्हें जिंदगी में ला पाना, मेरे बस की बात नहीं। तुम्हें बस देख कर ही जी लेंगे, तुम्हें बगैर देखे रह पाना, मेरे बस की बात नहीं। तुम ही पहली और आखरी मोहब्बत, पहली मोहब्बत भुला पाना, मेरे बस की बात नहीं। अगर तुम ना हुई कभी मेरी तो, किसी और को अपना पाना, मेरे बस की बात नहीं। दुनिया से दिल भर चुका मेरा, अब और जिंदा रह पाना, मेरे बस की बात नहीं। देवेश साखरे ̵... »

तेरे प्यार का नशा

इस कदर छाया है तेरे प्यार का नशा। बस तेरी यादें ही दिलो-दिमाग पर बसा। तुमसे दूर अब रहा भी न जाए। ये जुदाई अब सहा भी न जाए। कब उखड़ जाए ये चंद सांसें, ना पुछो कुछ कहा भी न जाए। ना मिलूं तो चैन नहीं, मिलकर बिछड़ना गवारा नहीं, तुमसे मिलूं, न मिलूं, कशमकश में दिल फंसा। इस कदर छाया है तेरे प्यार का नशा। बस तेरी यादें ही दिलो-दिमाग पर बसा। तेरी मदहोश खुशबू। बेचैन करती मुझे हर-शू। जाने क्या हो गया मुझे, ... »

इस प्यार में

बगैर प्यार के कुछ भी नहीं संसार में। वो कहते हैं क्या रखा है, इस प्यार में। हंसीन लगती यह दुनिया, प्यार होते ही, जहां की खुशियां सिमटी, इस प्यार में। कैसे दिलाएं तुम्हें एतबार, इस प्यार का, जां तक कुर्बान कर सकते, इस प्यार में। ना करेंगे, ना होने देंगे, रुसवा ‘देव’ तुम्हें, मोहब्बत को परस्तिश माना, इस प्यार में। देवेश साखरे ‘देव’ »

तुम्हारे बगैर

तुम्हारे बगैर जी तो नहीं सकता, हाँ, मर जरूर सकता हूँ । पर मर कर भी यदि चैन न मिला तो, मेरी रूह भटकेगी। तुम्हें पाने को तड़पेगी। तुम्हें परेशान करने का इरादा नहीं है । मेरी ख्वाहिशें भी कोई ज्यादा नहीं है । सिर्फ़ तुम्हारा साथ चाहता हूँ । हाथों में तुम्हारा हाथ चाहता हूँ । खुशियों की सौगात चाहता हूँ । बताना दिल के जज्बात चाहता हूँ । तुम, हाँ तुम ही मेरी, पहली और आखिरी मोहब्बत हो। हाँ तुम ही वो लड़की... »

तुम्हारी तस्वीर

तुम्हारी तस्वीर से बातें करता हूं। कभी कुछ सोच कर हंसता हूं। कभी कुछ सोच कर रो देता हूं। कभी बस एकटक निहारता हूं। तो कभी चूम लेता हूं। तुम्हारी तस्वीर से बातें करता हूं। कभी सोचता हूं, कि तुम होती सामने, तो ये कहता, वो सुनता, कभी सोचता हूं, तुम्हें बाहों में भर लेता। लेकिन तुम मेरे करीब नहीं। गम-ए-जुदाई में शरीक नहीं। मेरा तो अब ये हाल है। नहीं जीता हूं, ना ही मरता हूं। बस तुम्हारी यादों में ही खो... »

मेरी रूह

तू मेरी रूह में, कुछ इस तरह समाई है। के रहमत मुझपर, रब की तू ख़ुदाई है। तू नहीं तो मैं नहीं, कुछ भी नहीं, शायद तुझे पता नहीं, मेरा वजूद तुने बनाई है। तू यहीं है, यहीं कहीं है, मेरे आसपास, हवा जो तुझे छू कर, मुझ तक आई है। तेरी खुशबू से महकता है, चमन मेरा, तेरा पता, मुझे तेरी खुशबू ने बताई है। मैं भी इत्र सा महक उठा तेरे आगोश में, टूटकर जब तू, गले मुझको लगाई है। देवेश साखरे ‘देव’ »

ख़ुदा पर यकीं

ख़ुदा पर जो भी बंदा यकीं दिखाता है। तलातुम में फँसी वो सफीना बचाता है। कठपुतलीयों की डोर है उसके हाथों में, जाने कब, कहाँ, कैसे, किसे नचाता है। जो किरदार उम्दा निभा गया रंगमंच में, खुशियों का इनाम वो यक़ीनन पाता है। नसीब का लिखा, ना टाल सका कोई, किये का हिसाब वो ज़रूर चुकाता है। दौलत ना सही, पर दुआएं कमाई मैंने, बुरे वक़्त में ‘देव’ दुआएं काम आता है। देवेश साखरे ‘देव’ तलातु... »

सजा ना सकूंगा

अपनी ज़िंदगी फिर सजा ना सकूंगा। प्यार का साज फिर बजा ना सकूंगा। क्या मैं इतना मजबूर हो गया हूं, कि तुम्हें फिर बुला ना सकूंगा। क्या तुम इतनी दूर हो गई हो मुझसे, कि तुम्हें गले फिर लगा ना सकूंगा। अब आ भी जाओ और ना तड़पाओ, गमे-ज़ुदाई सीने में फिर दबा न सकूंगा। देवेश साखरे ‘देव’ »

तेरे इंतज़ार में

हां कहती, नहीं ना कहती हो, छोड़ रखा बीच मझधार में। सारी जिंदगी बीता दूंगा मैं, सनम बस तेरे इंतज़ार में। नादान बन कहती, तुमसे प्यार कहां है। होंठों पर ना है, और दिल में हां है। कुछ तो सिला दो, मेरी मोहब्बत का, कह दो मुझे भी तुमसे प्यार हां है। दिलाते हैं इतना यकीन तुम्हें, दे सकते जां तुम्हारे प्यार में। सारी जिंदगी बीता दूंगा मैं, सनम बस तेरे इंतज़ार में। फीके लगते हैं सभी हंसीन नज़ारे। सच है नहीं... »

प्यार

पहली ही नजर में पूरी हो आस, ख़त्म हो जैसे बरसों की तलाश। जिसके वास्ते था मैं बेकरार, शायद इसे ही कहते हैं प्यार। प्यार में नज़रों की, ज़ुबाँ होती है, ख़ामोश हाले-दिल बयां होती है। बस इंतज़ार हो दीदार-ए-यार, शायद इसे ही कहते हैं प्यार। दिल कहे, हां यही है जिंदगानी, संग जिसके जीवन है बितानी। जिसके बिना अधूरा हो संसार, शायद इसे ही कहते हैं प्यार। प्यार करो तो ताउम्र निभाओ, प्यार की एक मिसाल बनाओ। आंख... »

सर्द रातें

ठिठुरती रातों में वो हवाएँ जो सर्द सहता है। किसे बताएँ मुफ़्लिसी का जो दर्द सहता है। ज़मीं बिछा आसमां ओढ़ता, पर सर्द रातों में, तलाशता फटी चादर, जिसपे कर्द रहता है। पाँव सिकोड़, बचने की कोशिशें लाख की, पर बच ना सका, हवाएँ जो बेदर्द बहता है। किसको इनकी परवाह, कौन इनकी सुनता, देख गुज़र जाते, कौन इन्हें हमदर्द कहता है। रोने वाला भी कोई नहीं, इनकी मय्यत पर, खौफनाक शबे-मंज़र, बदन ज़र्द कहता है। देवेश स... »

सूखे गुलाब

किताबों में दबे गुलाबों की, अपनी अलग दास्तां होती है। बगैर कुछ कहे ख़ामोशी से, उनकी कहानी बयां होती है। भले ही वह सूख जाए, पर सदा जवान होती है। सम्भाल कर रखने वाले की, सबसे बढ़ कर जान होती है। किसी का प्यार से दिया तोहफा, क़िस्मत पर मेहरबान होती है। इन्हीं हंसीन यादों के सहारे ही, सारी जिंदगी आसान होती है। देवेश साखरे ‘देव’ »

प्यार चाहिए

मुझे एहसान नहीं प्यार चाहिए। मुझे रहम नहीं एतबार चाहिए। तुम ही मेरे दिल की सुकून हो, मुझे तड़प नहीं करार चाहिए। बगैर तुम्हारे अब जीना है मुहाल, मुझे तसव्वुर नहीं दीदार चाहिए। बरसों से जिंदगी का चमन है सूना, मुझे खिजां नहीं बहार चाहिए। देवेश साखरे ‘देव’ »

शहर की चकाचौंध

गाँव की जमीं बेच दी, पुश्तैनी मकां बेच दिया। शहर की चकाचौंध खरीदी, खुशियों का जहां बेच दिया। मिट्टी की सौंधी महक, चिड़ियों की मधुर चहक। नीम की ठंडी छाँव, मिट्टी में सने पाँव। खेतों को जाती पगडंडीयाँ, बैलों के गले बंधी घंटीयाँ। तालाब में गोते लगाना, चूल्हे में पका खाना। जमीन पर बिछा आसन, परिवार के संग भोजन। मटके का ठंडा पानी, दादा-दादी की कहानी। यह मधुर स्मृतियाँ हमने, ना जाने कहाँ बेच दिया। शहर की... »

दिल के करीब

समझते थे जिन्हें हम अपने दिल के करीब। मेरे खिलाफ शाजिसो में वो निकले शरीक। हमें कोई शिकवा न होता, गर वो गैर होता, पर वो तो थे, हमारे सबसे अज़ीज़ रफ़ीक। देवेश साखरे ‘देव’ रफ़ीक-साथी »

तेरा ही ज़िक्र

तेरा ही ज़िक्र है, मेरी हर एक नज़्म में। इरादा नहीं तू रूसवा हो, भरी बज़्म में। पढ़ता हूँ कुछ, चला जाता तेरी ही रूख़, हार जाता हूँ मैं, दिलो-ज़ेहन के रज़्म में। पहलू में गर तू हो, ज़रूरत नहीं ज़िक्र की, पर लगता कुछ तो कमी है, मेरी हज़्म में। यहाँ चेहरे तो बहुत से हैं, पर हर चेहरे में, तेरा ही चेहरा नज़र आता, मेरी चश्म में। सात फेरे हो, या फिर हो जश्ने-ज़िन्दगी, तू साथ हो मेरे, ज़िन्दगी की हर रस्म ... »

शोलों सा जला

शोलों सा जला मैं, बरसा बादलों सा कभी। हालाते-दीवानगी पर, कहकशे लगाते सभी। मजनूँ ना सही, इश्क मेरा भी कुछ कम नहीं, तुम कहो तो तुम्हारे वास्ते, मैं जाँ दे दूँ अभी। देवेश साखरे ‘देव’ »

शजर

शजर

तेरे हाथ सौगात, मेरे हाथ भी सौगात। मेरे मन में पाप और तेरे नेक जज़्बात। तुमने दिया हमें, जीने की नेमतें सारी, मैं खुदगर्ज तुझपे करता रहा आघात। मिटा कर वज़ूद तेरा, किसे छला मैंने, तेरे बगैर मेरी, कुछ भी नहीं औकात। शजर की कीमत ना समझी अब अगर, बद से बदतर होते जाएंगे फिर हालात। देवेश साखरे ‘देव’ शजर- पेड़ »

फ़ैशन

फ़ैशन की चरम तो देखो। लोगों की भरम तो देखो। कांच की अलमारी में बंद, ऊँची कीमत बढ़ा रही शान। तार-तार सा हुआ चिथड़ा, टंगा बनकर एक परिधान। उस चिथड़े के करम तो देखो। फ़ैशन की चरम तो देखो। लोगों की भरम तो देखो। जिसे फेंक दिया जाता, पोंछा भी ना बन पाता। फ़ैशन की हद तो देखो, युवा पहन कर इतराता। फ़ैशन का ज्ञान परम तो देखो। फ़ैशन की चरम तो देखो। लोगों की भरम तो देखो। पश्चिमी हमारी पारंपरिक, वेषभूषा अपना रह... »

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