हालात फिर बदले

कल भी हम थे ,ये जमीं थी
पर वो पाँव नहीं थे
ढूंढ सकते जो तेरे क़दमों के निशाँ

हालात फिर बदले

इन पाँव को
मिली कोई मंज़िल
जो थी तेरे
पलकों की महफ़िल

हालात फिर बदले

मेरे पाँव ,तुम्हारे पाँव
अब हमारे हो गए
लगने लगे सब बेगाने
तुम इतने हमें प्यारे हो गए

हालात फिर बदले

तुम लौट गए सफर से
मिटाकर उन क़दमों के निशां
जिस राह पर कदम थे मेरे
नहीं थे तुंम्हारे क़दमों के निशां

हालात फिर बदले

हम तुम और मैं हो गए
जमीं रही वही मगर
हम भी रहे ,सफर भी रहा
पर रहा न कोई हमसफ़र

हालात फिर बदले

मैं हूँ मेरे पाँव है
तुम हो तुम्हारे पाँव है
पर तले उसके
वो साँझा जमीं न रही

Comments

2 responses to “हालात फिर बदले”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

  2. Abhishek kumar

    Gajab

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