ख़ुद पर यक़ीन नहीं रहा आज से।

ख़ुद पर यक़ीन नहीं रहा आज से।
अब धोख़ा ही मिला इस अंदाज़ से।।
@@@@RK@@@@

Comments

3 responses to “ख़ुद पर यक़ीन नहीं रहा आज से।”

  1. Abhishek kumar

    सुन्दर रचना

  2. Abhishek kumar

    👏👏

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