ग़मे-ए-मुदाम

ग़मे-ए-मुदाम से इस कदर परेशां न हो ,
सुना है हर गम के पंख भी होते है
राजेश’अरमान’

Comments

2 responses to “ग़मे-ए-मुदाम”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

  2. Abhishek kumar

    Superb

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